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शाला त्यागी बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़ कर किया कर्तव्यों का पालन

भोपाल के सरकारी कॉलेज में पढ़ने वाली अर्पिता को अपनी जाग्रिक यात्रा के दौरान एक टास्क मिला, जिसमे उन्हें कुछ बच्चों को (जिन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी हो) स्कूल से जोड़ना था।


अर्पिता ने इस टास्क के अंतर्गत अपने कॉलेज की गोद ग्राम बस्ती ईश्वर नगर में तीन ऐसे बच्चों की पहचान की। इनमें से एक बच्ची के पिताजी की शराब के कारण मौत हो गई थी, इस कारण उस बच्ची को घर घर जाकर काम करना पड़ रहा था । इसी कारण उसने पढ़ाई को छोड़ दी थी | 


अर्पिता ने बच्चे की मां को समझाने का प्रयास किया। शुरुआत में तो वे बिल्कुल नहीं मानी, फिर अर्पिता ने शिक्षा के अधिकार तथा शिक्षा से होने वाले फायदों को बच्ची की मां को बताया। कुछ दिनों तक बातचीत के पश्चात बच्ची की मां उसका एडमिशन कराने के लिए मान गई।


अर्पिता ने उनकी मित्र शिवानी के साथ मिलकर पास ही स्थित सरकारी स्कूल में बातचीत की। हालांकि बीच सत्र में एडमिशन कराना मुश्किल था, अतः छह-सात महीने की मशक्कत के बाद बालिका को शिक्षा से जोड़ने में अर्पिता और शिवानी कामयाब रहे।